शाम से आँख में नमी सी है

Poet: गुलज़ार By: Daiyan, Lahore

शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है

दफ़्न कर दो हमें कि साँस आए
नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है

कौन पथरा गया है आँखों में
बर्फ़ पलकों पे क्यूँ जमी सी है

वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
आदत इस की भी आदमी सी है

आइए रास्ते अलग कर लें
ये ज़रूरत भी बाहमी सी है

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11 Sep, 2023
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